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Women should Get the Same Payment as Men – Dr Zakir Naik



Women should Get the Same Payment as Men – Dr Zakir Naik

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10 Comments

  1. ☝🏻✅🌍👁️👁️🧠
    कुरआन और हदीस में कमज़ोर का हक़ खाने, मज़दूर की मज़दूरी रोकने, और किसी इंसान से ज़ुल्म करने को हराम कहा गया है — चाहे वो औरत हो या मर्द।

    📖 कुरआन क्या कहता है?

    1) हक़ और इंसाफ़ का हुक्म

    > ﴿إِنَّ اللّٰهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ﴾
    “निश्चय ही अल्लाह इंसाफ़ का हुक्म देता है।”
    (सूरह अन-नहल 16:90)

    यानी तनख़्वाह में इंसाफ़ — कोई ज़ुल्म नहीं।

    2) औरत और मर्द दोनों की कमाई बराबर मानी जाती है

    > ﴿لِلرِّجَالِ نَصِيبٌ مِمَّا اكْتَسَبُوا وَلِلنِّسَاءِ نَصِيبٌ مِمَّا اكْتَسَبْنَ﴾
    “मर्द को उसके कमाए का हक़ है और औरत को उसके कमाए का हक़ है।”
    (सूरह अन-निसा 4:32)

    यानी औरत की कमाई कोई ‘कम’ दर्जे की नहीं —
    दोनों की मेहनत की क़ीमत बराबर है।

    3) मज़दूर की मज़दूरी न कम करो न देर करो

    > ﴿وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ﴾
    “लोगों के हक़ में कमी न करो।”
    (सूरह हूद 11:85)

    इसमें साफ़ तौर पर सैलरी कम देने की मनाही है।

    📜 हदीस में सख़्त चेतावनी

    > نَبِي ﷺ ने फ़रमाया:
    "मज़दूर का पसीना ख़त्म होने से पहले उसकी मज़दूरी अदा करो।”
    (सुनन इब्न माजा 2443)

    यानी —

    तन्ख़्वाह पूरा दो

    समय पर दो

    भेदभाव मत करो

    ✅ इस्लाम का साफ़ उसूल

    मुद्दा इस्लामी हुक्म

    एक जैसा काम एक जैसी मज़दूरी / सैलरी
    मेहनत में बराबरी हक़ में भी बराबरी
    औरत की कमाई उसका पूरा हक़, कोई कमी नहीं

    इस्लाम में औरत या मर्द होना तन्ख़्वाह तय करने की वजह नहीं है।
    क़ीमत मेहनत की है — जेंडर की नहीं।

    🕌 निष्कर्ष (सीधी बात)

    दुनिया में समाज और सिस्टम की वजह से अभी भी महिलाओं को कम तनख़्वाह मिलती है

    लेकिन इस्लाम और कुरआन ने इसे ज़ुल्म और हराम कहा है

    इस्लाम में मजदूरी का पैमाना — मेहनत है, लिंग (Gender) नहीं

  2. महिलाओं को पुरुषों के समान भुगतान मिलना चाहिए।
    👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
    Equal Remuneration Act, 1976 भारत में बनाया गया केंद्रीय (Union) कानून है।

    📍 यह कानून कहाँ बनाया गया?

    यह भारत की संसद (Parliament of India) में पास हुआ।
    यानी यह पूरे भारत में लागू होने वाला कानून है — सिर्फ़ किसी एक राज्य में नहीं।

    📅 यह कानून कब बनाया गया?

    1976 में संसद ने इसे पास किया।

    8 मार्च 1976 को यह कानून आधिकारिक रूप से लागू (Enforce) हुआ।

    ✍️ इसे किस सरकार ने पास किया?

    उस समय भारत में इंदिरा गांधी की सरकार थी
    (Indian National Congress के समय में यह कानून बनाया गया।)

    🔹 इस कानून का मकसद क्या था?

    > "एक जैसे काम के बदले पुरुष और महिला को बराबर तनख़्वाह दी जाए"

    यानी:

    Salary में भेदभाव नहीं किया जा सकता

    Appointment (भर्ती) में भेदभाव नहीं किया जा सकता

    Promotion और Work Opportunity में भी बराबरी रखनी होगी

    📌 ध्यान देने वाली बात

    2019 में भारत सरकार ने नए श्रम कानूनों (Labour Codes) के तहत
    इस कानून को मर्ज (Merge) कर के Code on Wages, 2019 में शामिल कर दिया है।

    लेकिन उसका मूल नियम अब भी वही है:

    > एक जैसा काम → एक जैसी सैलरी
    आदमी या औरत होने से Salary नहीं बदलेगी।

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