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The Quran has the Solution for Racism, Terrorism, Injustice and Alcoholism – Dr Zakir Naik



The Quran has the Solution for Racism, Terrorism, Injustice and Alcoholism – Dr Zakir Naik

#Quran #Racism #Terrorism #Alcoholism

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13 Comments

  1. لا اله الا الله الله کی جنت میں سردار رقيه رضى الله عنها بنت الله کے آخری نبی سارے نبیوں علھیم السلام کے سردار سپه سالار اعظم محمد رسول الله صلى الله عليه وسلم سردار عيسى صلى الله عليه وسلم كى امى سردار مريم رضى الله عنها سردار آسيه رضى الله عنها سردار فداء الله حفظه الله كى بیویاں ھیں پاکستان ساری دنیا ادارہ سپه سالار اعظم محمد رسول الله صلى الله عليه وسلم كا پیغام پڑھے پاکستان

  2. Just wanted to remind you how much of a liar you are. Congratulations I think you have become the 2nd biggest liar of all time. Muhammad is the no.1 biggest liar but you are not 2. 🎉

  3. लालच (Greed) और जिद (Stubbornness) इंसान की सबसे ख़तरनाक बुराइयों में से हैं। कुरआन इन दोनों के बारे में बहुत साफ़ और सख्त हिदायत देता है—क्योंकि लालच इंसान को अंधा, ज़ालिम और हक़ से दूर कर देता है।

    नीचे कुरआन की सबसे अहम हिदायतें सरल और गहरे तरीके से पेश हैं:

    ✅ 1. लालच इंसान को बरबाद कर देता है

    سورہ الهمزہ (104:2–3)

    > الَّذِي جَمَعَ مَالًا وَعَدَّدَهُ
    يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُ أَخْلَدَهُ

    अर्थ:
    जो माल को जमा-जमा कर रखता है और गिनता रहता है,
    वह यह समझता है कि उसकी दौलत उसे हमेशा जिंदा रखेगी।

    ➡️ हिदायत:
    लालच इंसान को ये धोका दे देता है कि वह हमेशा रहेगा।
    जबकि असल में यह उसे हलाकत के गड्ढे में ले जाता है।

    ✅ 2. लालच दिल को सख्त करता है

    सूरह बकरा (2:96)

    > “तुम उनको पाएगे कि लोग सबसे ज़्यादा दुनिया की लालच रखते हैं।”

    ➡️ हिदायत:
    लालच का नतीजा यह होता है कि दिल नाकारा, कमज़ोर और सख्त हो जाता है।

    ✅ 3. लालच इंसान को जिद्दी और नाफरमान बनाता है

    सूरह अल-फ़ज्र (89:17–20)

    > “बल्कि तुम यतीमों की इज़्ज़त नहीं करते,
    और मिसकीन को खिलाने पर ताकीद नहीं करते,
    और माल को बहुत ज़्यादा प्यार करते हो।”

    ➡️ हिदायत:
    लालच इंसान को इतना जिद्दी बना देता है कि
    वह अच्छाई के काम करना बंद कर देता है
    और दूसरों के हक़ मारने लगता है।

    ✅ 4. इंसान की फ़ितरत में लालच है—अल्लाह ने मना किया है कि उसे काबू करो

    सूरह मआरिज़ (70:19)

    > “इंसान बहुत बेचैन और लालची पैदा किया गया है।”

    ➡️ हिदायत:
    अल्लाह बता रहा है कि लालच इंसान की फ़ितरत में है,
    लेकिन ईमान, सब्र और नमाज़ ही उसे काबू कर सकती है।

    ✅ 5. जिद (Stubbornness) अल्लाह को नापसंद है

    सूरह बकरा (2:93)

    > “उन्होंने कहा: हमने सुना और हमने ना-फरमानी की।”

    ➡️ हिदायत:
    जिद्दी इंसान हक़ सुनकर भी मानता नहीं।
    कुरआन इसे नफ़्स का रोग बताता है।

    ✅ 6. इलाज क्या है? — कुरआन की हिदायत

    कुरआन लालच और जिद के इलाज के लिए 5 चीज़ें बताता है:

    (1) दिल मुलायम करो — नमाज़

    70:22–23
    नमाज़ इंसान को लालच से बचाती है।

    (2) माल की जकात/सदक़ा

    9:103
    सदक़ा दिल को पाक करता है और लालच खत्म करता है।

    (3) सब्र

    2:153
    सब्र लालच की जड़ काटने वाली सबसे बड़ी दवा है।

    (4) आख़िरत का ख़ौफ़

    102:1–5
    “ज़्यादा करने की लालच ने तुमको ग़ाफ़िल कर रखा है।”

    (5) दूसरों का हक़ न मारो

    4:29
    कुरआन कहता है: “एक-दूसरे का माल नाजायज़ तरीके से मत खाओ।”

    🌙 निचोड़ (Strong Summary)

    कुरआन के मुताबिक:

    ✔ लालच इंसान को अंधा कर देता है।
    ✔ लालच इंसान को जिद्दी और जालिम बना देता है।
    ✔ लालच इंसान की बरबादी की वजह बनता है।
    ✔ इससे बचने की दवा—नमाज़, सब्र, सदक़ा, और आख़िरत को याद रखना।

  4. I have lost faith in Islam becoz of 500 years old ruling on mahram that ruin family relations. Islam is cruel. Been a muallaf since Oct 1995… own family abandoned… now was told my child whom I cared for the past 20 years is not my mahram becoz of my mistakes? Now isnt Islam cruel???

  5. Social (सामाजिक) और Secularism (धर्म-निरपेक्षता) दोनों का आसान अर्थ और फिर इन दोनों मसलों पर कुरआन की हिदायत बहुत साफ़ और संतुलित तरीके से समझा रहा हूँ।

    ✅ 1. Social (सामाजिक) का मतलब

    Social मतलब
    समाज से जुड़ी बातें — इंसानों के साथ अच्छा व्यवहार, इंसाफ, मदद, बराबरी, और एक-दूसरे के हक़ अदा करना।

    यानी इंसान इंसान के साथ कैसा व्यवहार करे।

    ✅ 2. Secularism (धर्म-निरपेक्षता) का मतलब

    Secularism का मतलब:

    राज्य (सरकार) किसी एक धर्म को थोपे नहीं, किसी धर्म का पक्ष न ले, और हर धर्म को बराबर हक़ दे।

    यानी–
    सरकार निरपेक्ष रहे
    और लोग अपना धर्म आज़ादी से मान सकें।

    👉 इसका मतलब यह नहीं कि इंसान धर्म से दूर हो जाए।
    👉 इसका मतलब राज्य किसी को मजबूर न करे।

    📖 अब: इस मसले पर कुरआन की हिदायत क्या है?

    कुरआन किसी जगह “Secularism” शब्द इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन इसके उसूल (Principles) ज़रूर बताता है।

    🌙 A. कुरआन में “Social / समाज” के बारे में हिदायत

    1️⃣ इंसाफ पर क़ायम रहो—even अपने खिलाफ

    कुरआन:

    > “ऐ ईमान वालों! इंसाफ पर मजबूती से खड़े रहो, अल्लाह के लिए गवाही दो, चाहे वह खुद तुम्हारे खिलाफ हो या तुम्हारे रिश्तेदारों के खिलाफ।”
    (सूरह निसा 4:135)

    यानी समाज का पहला उसूल इंसाफ है।

    2️⃣ लोगों के साथ अच्छा और नरमी से पेश आओ

    कुरआन:

    > “लोगों से अच्छी बातें कहो।”
    (सूरह बकरा 2:83)

    3️⃣ गरीब, यतीम, पड़ोसी, मुसाफ़िर — सबका हक़

    कुरआन:

    > “रिश्तेदार, यतीम, मिस्कीन, पड़ोसी और मुसाफ़िर का हक़ अदा करो।”
    (4:36)

    4️⃣ समाज में फ़साद मत फैलाओ

    कुरआन:

    > “अल्लाह फ़साद करने वालों को पसंद नहीं करता।”
    (2:205)

    🌙 B. कुरआन में “Secularism / धार्मिक निरपेक्षता” जैसा उसूल

    कुरआन चार जगह बहुत साफ़ उसूल देता है:

    1️⃣ “दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं”

    सबसे बड़ा उसूल:

    > “दीन के मामलों में ज़बरदस्ती नहीं।”
    (सूरह बकरा 2:256)

    यानी —
    किसी को इस्लाम क़बूल करवाने, रोकने या मजबूर करने का हक़ नहीं।

    यह धर्म-स्वतंत्रता (freedom of religion) का कुरआनी सिद्धांत है।

    2️⃣ “तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए, उनका दीन उनके लिए”

    कुरआन:

    > “तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए और मेरा दीन मेरे लिए।”
    (सूरह काफ़िरून 109:6)

    यह भी एक धार्मिक स्वतंत्रता का उसूल है।

    3️⃣ “ग़ैर-मुसलमानों के साथ इंसाफ और अच्छा व्यवहार करो”

    कुरआन:

    > “अल्लाह तुम्हें उन लोगों से अच्छा और इंसाफ वाला व्यवहार करने से नहीं रोकता जो तुमसे धर्म के मामले में लड़ाई नहीं करते।”
    (सूरह मुमतहिना 60:8)

    यानी–
    जो शांतिप्रिय हैं, उनके साथ:

    बराबरी

    इंसाफ

    बिना ज़ुल्म के व्यवहार

    4️⃣ “अगर वे तुम्हारे धर्म पर नहीं, तो तुम उनके धर्म पर न जाओ” — लेकिन झगड़ा नहीं

    कुरआन:

    > “तुम्हें तुम्हारा दीन और मुझे मेरा दीन।”
    (109:6)

    मतलब —
    हर इंसान को अपने धर्म पर अमल करने की आज़ादी है।

    📘 इसका निचोड़:

    ✔ Social (समाज) के बारे में कुरआन के उसूल

    इंसाफ

    बराबरी

    हक़ अदा करना

    ज़ुल्म न करना

    फ़साद से बचना

    सबके साथ अच्छा व्यवहार

    ✔ Secularism (धर्म-निरपेक्षता) के बारे में कुरआन के उसूल

    दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं

    हर इंसान को अपने धर्म पर अमल करने की आज़ादी

    शांतिप्रिय ग़ैर-मुसलमानों के साथ इंसाफ

    धर्म के नाम पर ज़ुल्म या मजबूरी नहीं

    🕊 इस्लाम का मॉडल: न्याय + धार्मिक आज़ादी

    कुरआन का सिस्टम यह है:

    “इंसाफ सबके लिए, दीन हर एक अपने लिए।”

    यही असल में एक तरह से secular justice (न्याय आधारित धर्म-स्वतंत्रता) से मिलता-जुलता है।

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