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Jihaad with the Word and the Sword – Dr Zakir Naik

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👁️👁️🧠✅ कलम कि जिहाद से दुनिया को इल्म मिलता है खुन नहीं बहता है।
अल्लाह ने इंसान को सबसे बड़ी नेमत “कलम” (Pen) और “इल्म” (Knowledge) दी — और इसे कुरआन ने बहुत साफ़ और ताक़तवर अंदाज़ में बयान किया है।
नीचे कुरआन की आयतों के आधार पर संक्षिप्त और स्पष्ट विवरण दिया जा रहा है:
—
🟩 1️⃣ सबसे पहली नाज़िल आयत — इल्म और कलम
सूरह अल-अलक (96:1–5)
> “पढ़ो, अपने रब के नाम से…”
“जिसने इंसान को कलम के ज़रिये इल्म सिखाया।”
✔ इंसान को इंसान बनाने वाली चीज़ = इल्म
✔ इल्म का पहला ज़रिया = क़लम (Pen)
✔ अल्लाह ने बताया कि लिखना, सीखना, समझना — उसकी दी हुई हिदायत है
—
🟧 2️⃣ अल्लाह ने सभी इंसानों को इल्म की खोज का हुक्म दिया
कुरआन 20:114
> “ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा कर।”
✔ इल्म बढ़ाना इबादत है
✔ मुसलमान को हमेशा सीखते रहना चाहिए
✔ यह दुआ खुद अल्लाह ने सिखाई है
—
🟦 3️⃣ इल्म को नूर कहा गया है
कुरआन 39:9
> “क्या जानने वाला और न जानने वाला बराबर हो सकते हैं?”
✔ इल्म वाला ऊँचा है
✔ अज्ञान (जेहालत) अंधेरा है
✔ इल्म इंसान को पहचान और हिदायत देता है
—
🟩 4️⃣ कलम और किताब — अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत
कुरआन 68:1 (सूरह क़लम)
> “नून। क़लम की क़सम और वह जो लिखते हैं।”
✔ अल्लाह खुद कलम की क़सम खाता है
✔ लिखना — इबादत और इंसान की तरक्की का आधार
✔ यही कलम से इंसान सभ्य बना
—
🟧 5️⃣ कुरआन इंसान को सोचने और समझने की दावत देता है
कुरआन में बार-बार आता है:
“क्या तुम सोचते नहीं?”
“क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते?”
“क्या तुम गौर नहीं करते?”
✔ यानी इल्म सिर्फ पढ़ने का नाम नहीं
✔ बल्कि सोचने, समझने, तर्क करने का नाम है
—
🟦 6️⃣ इल्म अपनाना — अंधकार से उजाले में आना
कुरआन 2:257
> “अल्लाह ईमान वालों को अंधेरे से निकाल कर नूर (ज्ञान) की तरफ लाता है।”
✔ इल्म = नूर
✔ जेहालत = अंधेरा
✔ अल्लाह का पैग़ाम = जिंदगी का उजाला
—
🟩 कुल सार (कुरआन के मुताबिक)
✔ अल्लाह ने इंसान को “कलम” दिया — ताकि लिखे, सीखे, समझे
✔ इल्म देकर इंसान को बाकी मखलूक से ऊपर बनाया
✔ सोचने, पढ़ने, तर्क करने का हुक्म दिया
✔ इल्म को नूर, और जेहालत को अंधेरा कहा
✔ कुरआन खुद “इल्म की किताब” है — इंसान को हिदायत देने के लिए
👁️👁️🧠✅ “Jihad with the Word and the Sword”
यानि “कलम के साथ जिहाद और तलवार के साथ जिहाद” — यह एक इस्लामी वाक्य है, और इसका कुरआनी मतलब बिल्कुल स्पष्ट है।
इसका गलत अर्थ हिंसा नहीं है।
कुरआन इसको दो अलग, वैध और संतुलित रूपों में समझाता है।
नीचे कुरआन की रोशनी में पूरा अर्थ दिया जा रहा है:
—
🟩 1️⃣ Jihad with the Word (क़लम/बयान/सच्चाई के साथ जिहाद)
कुरआन में सबसे बड़ा और पहला जिहाद “क़ौल” (word) और “बयान” (speech) से बताया गया है।
कुरआन 25:52 — ये सबसे साफ़ हुक्म है:
> “उनके खिलाफ़ इस कुरआन के साथ बड़ा जिहाद करो।”
यानी: ✔ हक़ की बात कहना
✔ सच को फैलाना
✔ तर्क, दलील, इल्म से लोगों को समझाना
✔ ज़ुल्म, झूठ, अज्ञानता के खिलाफ आवाज उठाना
इसको “जिहाद बि-ल-कलिमा / जिहाद बि-ल-क़ुरआन” कहा जाता है।
🔸 यह सबसे ऊँचा और सबसे पहले वाला जिहाद है।
🔸 इसमें कोई हिंसा नहीं — सिर्फ इल्म, तर्क और दावत है।
—
🟧 2️⃣ Jihad with the Sword (तलवार के साथ जिहाद)
कुरआन में “तलवार से जिहाद” का हुक्म बहुत सीमित, सख्त शर्तों और सिर्फ सुरक्षा/रक्षा के लिए है।
कुरआन तलवार से जिहाद को इजाज़त देता है लेकिन फर्ज़ नहीं करता — और वह भी सिर्फ:
✔ जब मुसलमानों पर हमला हो
✔ जब निकाल दिया जाए
✔ जब ज़ुल्म हो
✔ जब लड़ाई उनकी तरफ से शुरू की जाए
कुरआन 22:39 (पहली इजाज़त)
> “जिनसे लड़ाई की जा रही है उन्हें इजाज़त दी गई है क्योंकि उन पर ज़ुल्म हुआ है।”
कुरआन 2:190
> “अल्लाह की राह में उन लोगों से लड़ो जो तुमसे लड़ते हैं — लेकिन हद से मत बढ़ो।”
यानी: ✔ आक्रमण करने की इजाज़त नहीं
✔ सिर्फ self-defense
✔ निर्दोष को नुकसान पहुँचाना हराम
✔ अत्याचार रोकना उद्देश्य है, न कि सत्ता या जमीन
—
🟦 3️⃣ कुरआन में जिहाद का संतुलन
कुरआन कहता है:
कलम + दलील + सब्र = असल जिहाद
> “अपने रब की राह में पूरी मेहनत करो।” (22:78)
तलवार सिर्फ मजबूरी और सुरक्षा का उपाय
> “अगर वे झुक जाएँ, तो तुम भी झुक जाओ और अमन की तलाश करो।” (8:61)
यानी:
👉 कुरआन में वार्ता (Dialogue) पहले,
👉 रक्षा (Defense) बाद में।
—
🟩 4️⃣ परिणाम: कुरआन का असली मतलब
Jihad with the Word = कुरआन, इल्म, हक़, दावत, समझाना
✔ सबसे बड़ा जिहाद
✔ हमेशा जारी
✔ इसमें तलवार नहीं
✔ सिर्फ सच की आवाज़
Jihad with the Sword = रक्षा और ज़ुल्म रोकना
✔ सीमित
✔ कठिन शर्तें
✔ निर्दोष को नुकसान हराम
✔ शांति मिलते ही रुकना
—
🟦 सरल भाषा में कुल मतलब
“पहले अपनी ज़बान और कुरआन के सच से जिहाद करो,
और अगर दुश्मन हमला कर दे —
तब सिर्फ आत्मरक्षा में लड़ो।”
यही कुरआन का संतुलित, शांति-आधारित दृष्टिकोण है।
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