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True Attributes and Names of God – Dr Zakir Naik



True Attributes and Names of God – Dr Zakir Naik

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8 Comments

  1. Allah Almighty Exalted Above the heaven

    Above His 'Arsh: (Above The Greatest Throne),

    Everything is under His knowledge, control & vision.

    All praise belongs to Allah Alone

    All power and all dominion.

    Allah created every existing being,

    Allah is Not like any created thing.

    Our Lord is Allah SWT. There is no 'True God' / 'True Ilah except Allah. Allah is Exalted Above ‘Arsh, above the heaven. Holy Qur'an is Allah's Word and final revelation for mankind. Allah is the One and Unique True Deity'. None is worthy of worship except Allah. Muhammad PBUH is Allah's servant and messenger ❤❤❤

    ////////////////////////////////////

  2. ☝️✅🌍👁️👁️🧠 📖 कुरआन — सूरह अल-इस्रा (17:111)

    अरबी: وَقُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيٌّ مِنَ الذُّلِّ وَكَبِّرْهُ تَكْبِيرًا

    हिंदी अनुवाद: “और कहो: तमाम तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, जिसने न कोई औलाद बनाई, न उसकी बादशाहत में कोई साझेदार है, और न उसे कमज़ोरी के कारण किसी सहायक की आवश्यकता है; और उसकी पूरी महानता बयां करो (अल्लाह को बहुत बड़ा जानो)।”

    🌙 पूरी आयत का अर्थ और सार

    यह आयत अल्लाह की तौहीद (एक अल्लाह) और उसकी परिपूर्ण महानता का ऐलान है।

    🔹 अल्लाह न किसी का बेटा है और न वह किसी का बाप है
    इसका मतलब — अल्लाह इंसानों, फ़रिश्तों, नबियों या किसी भी मख़लूक की तरह नहीं।
    वह अकेला है, बे-नियाज़ है।

    🔹 अल्लाह की बादशाहत में कोई साझेदार नहीं
    इसका मतलब — दुनिया और कायनात का कोई भी हिस्सा किसी और के हाथ में नहीं।

    🔹 अल्लाह को किसी मददगार की ज़रूरत नहीं
    क्योंकि वह कभी कमज़ोर नहीं पड़ता, थकता नहीं, ताक़त में कमी नहीं आती।

    🔹 फिर आदेश दिया: “वकब्बिरहु तक्बीरा”
    यानी अल्लाह की महानता को बहुत ज्यादा बयां करो
    — अल्लाह को सबसे बड़ा मानो
    — हर काम में अल्लाह की बरतरी स्वीकार करो
    — उसकी इबादत, उसकी आज्ञाकारिता, और उसका शुक्र करो

    🕌 इस आयत का उद्देश्य

    यह आयत तीन गलतियों को खत्म करती है:

    गलत अक़ीदा इस आयत का जवाब

    अल्लाह की औलाद मानना ❌ “लम यत्तखिज़ वलदन” – अल्लाह की औलाद नहीं
    अल्लाह के साथ साझेदार ठहराना ❌ “लम यकुन लहू शरीकुन फिल-मुल्क” – कोई साझेदार नहीं
    अल्लाह को कमज़ोर समझकर मददगार लगाना ❌ “लम यकुन लहू वलिय्यूं मिनअज़-ज़ुल” – अल्लाह को किसी की जरूरत नहीं

    💭 हमारी ज़िन्दगी के लिए संदेश

    यह आयत सिखाती है:

    ✔ अल्लाह अकेला ही मालिक है
    ✔ उसके सिवा कोई मददगार और पूज्य नहीं
    ✔ नबियों, फ़रिश्तों, मूर्तियों, इंसानों, क़ब्रों में “इलाही शक्ति” ढूँढना गलत है
    ✔ दुआ, इबादत, सहारा, मदद — सिर्फ़ अल्लाह से

    ❤️ जिस दिल में इस आयत का यक़ीन बैठ जाए

    वह सिर्फ़ अल्लाह से उम्मीद रखता है

    किसी से डरता नहीं, सिवाय अल्लाह के

    गुनाहों से बचता है

    शिर्क और गलत आस्थाओं से दूर रहता है

    दिल में सुकून उतर जाता है

    यही तौहीद की मिठास है।

    🤲 दुआ

    ऐ अल्लाह!
    हमारे दिलों में अपनी अकेली बादशाहत और अपनी महानता का यक़ीन पक्का कर दे।
    हमें हर तरह के शिर्क, मूर्ति-पूजा, इंसान-पूजा और ग़लत आस्थाओं से बचा ले।
    और हमें ऐसा ईमान दे कि हम हर हाल में केवल तुझपर भरोसा करें — आमीन।

  3. अल्लाह का नूर जब मुझे मालूम हुआ तो हमारे साथ यही हुआ था। कैंटीन मे खाते समय अपने आप आसूं जारी हो जाता अल्लाह का ताकत को सोच सोच कर (मुंद्रा कंपनी )🥲☝️✅🌍👁️👁️🧠😊
    📖 कुरआन — सूरह अल-इस्रा (17:109)

    अरबी: وَيَخِرُّونَ لِلْأَذْقَانِ يَبْكُونَ وَيَزِيدُهُمْ خُشُوعًا

    हिंदी अनुवाद: “और वे ठोड़ी के बल (सजदे की हालत में) गिर पड़ते हैं, रोते हुए; और उसे (कुरआन को) सुनकर उनका ख़ुशूअ (विनम्रता, डर, नम्रता) और बढ़ जाता है।”

    🕊️ आयत का संपूर्ण अर्थ

    यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो कुरआन को सच्चाई के साथ सुनते हैं, दिल से मानते हैं और उस पर ईमान लाते हैं।

    जब वे कुरआन की आयतें सुनते हैं —
    ✔ उनके दिल गवाही देते हैं कि यह अल्लाह का कलाम है
    ✔ उनके अंदर असर महसूस होता है
    ✔ वे अल्लाह की महानता और अपनी कमजोरी को पहचानते हैं
    ✔ और रोते-रोते सजदे में गिर जाते हैं

    यह आँसू कमजोरी के नहीं —
    बल्कि ईमान, डर-ए-खुदा, मोहब्बत और विनम्रता के आँसू होते हैं।

    🌧️ "ख़ुशूअ" का मतलब

    ख़ुशूअ =
    🔹 दिल का टूटकर अल्लाह के सामने झुक जाना
    🔹 घमंड का मिट जाना
    🔹 अल्लाह की महानता का एहसास
    🔹 गुनाहों पर शर्म
    🔹 और अल्लाह की रहमत की उम्मीद

    यानी कुरआन का असर ऐसा पड़ता है कि इंसान का दिल मुलायम हो जाता है, आँखें नम हो जाती हैं और रूह अल्लाह की तरफ़ झुक जाती है।

    🌙 आयत क्यों उतरी — पृष्ठभूमि

    यह आयत उन असली ईमान वालों की तारीफ़ में है —
    जिन्होंने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की दावत को सुना, कुरआन पढ़ा और सच्चाई पहचानकर ईमान ले आए।

    कहा गया है कि यह आयत उन अहल-ए-किताब (यहूदी-नसारा) के ईमान वालों के बारे में भी है जो जब कुरआन सुनते थे तो उसके नूर को पहचान लेते थे और रोते हुए सजदे में गिर जाते थे।

    🤍 आयत की शिक्षा

    यह आयत हमें बताती है कि:

    ❌ कुरआन सिर्फ़ पढ़ने की चीज़ नहीं है

    ✔ دل में उतरने की चीज़ है
    ✔ ज़िन्दगी बदल देने की चीज़ है

    ❌ कुरआन सुनने पर सिर्फ़ आवाज़ अच्छी लगना काफी नहीं

    ✔ दिल पर असर होना चाहिए
    ✔ गुनाहों से तौबा होनी चाहिए
    ✔ नमाज़, सज्दा, विनम्रता बढ़नी चाहिए

    जिस दिल पर कुरआन का असर पड़े —
    वही क़ामयाब दिल है।

    💡 आज के लिए संदेश

    अगर हम चाहते हैं कि:

    दिल मुलायम हो

    नफ्स और घमंड टूटे

    अल्लाह की मोहब्बत और डर बढ़े

    गुनाह छूटें

    तो कुरआन को ऐसे सुनें और पढ़ें जैसे अल्लाह हमसे बातें कर रहे हैं।

    उस वक़्त दिल के दरवाज़े खुल जाते हैं
    और इंसान की रूह रोते हुए सजदे में गिरना चाहती है —
    यही सच्चा ईमान की मिठास है।

    🤲 दुआ

    ऐ अल्लाह!
    हमारे दिलों को कुरआन के लिए वैसे ही मुलायम कर दे
    जैसे सच्चे ईमान वालों के दिल थे।
    हमारी आँखों से वह आँसू निकाल जो तेरी रहमत और डर से हों।
    और कुरआन से हमारा ख़ुशूअ, ईमान और आज़म बढ़ा दे — आमीन।

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