☝️✅🌍 👁️👁️🧠 क्या कुरआन का इल्म रखने वाला एक सच्चा मुसलमान किसी इंसान या मज़हब के खिलाफ़ हो सकता है?
कुरआन का जवाब बिल्कुल साफ़ है 👇
❌ 1️⃣ किसी इंसान से नफ़रत करना — कुरआन के खिलाफ़
कुरआन कहता है:
> “किसी क़ौम की दुश्मनी भी तुम्हें इस बात पर न उकसाए कि तुम इंसाफ़ छोड़ दो। इंसाफ़ करो — यही तक़वा के ज़्यादा करीब है।” 📖 सूरह अल-माइदा 5:8
यानी: ✔ दूसरे धर्म के लोग हों ✔ दुश्मन हों ✔ बुराई करने वाले हों
फिर भी नफरत नहीं — इंसाफ़।
कुरआन ऐसा मुसलमान पसंद करता है जो: ❌ नफ़रत न रखे ✔ इंसाफ़ रखे ✔ हक़ बात रखे ✔ अच्छाई फैलाए
—
❌ 2️⃣ मज़हब से नफ़रत करना — कुरआन के खिलाफ़
कुरआन के मुताबिक मुसलमान को यह हक़ नहीं कि वह किसी मजहब के खिलाफ़ नफ़रत फैले।
अल्लाह कहता है:
> “तुम उन लोगों के (मज़हबी) पूज्यों को बुरा न कहो जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं।” 📖 सूरह अल-अनआम 6:108
यानी दूसरों के मजहब और धार्मिक मान्यताओं को बुरा कहना पूरी तरह मना है।
—
🌍 3️⃣ कुरआन की राह — नफ़रत नहीं, दावत और अमन
कुरआन कहता है:
> “अपने रब के रास्ते की तरफ़ हिकमत और अच्छी नसीहत से बुलाओ — और उनसे अच्छे तरीके से बहस करो।” 📖 सूरह अन-नहल 16:125
मतलब: ✔ दावत दो ✔ प्यार से बात करो ✔ अच्छाई समझाओ ✔ किसी का दिल मत दुखाओ
—
❌ 4️⃣ मुसलमान को ज़बरदस्ती का हक़ नहीं
कुरआन बहुत स्पष्ट कहता है:
> “दीन (मजहब) में कोई ज़बरदस्ती नहीं।” 📖 सूरह अल-बक़रह 2:256
यानी: ❌ किसी को धर्म बदलने पर मजबूर करना ❌ धमकी देना ❌ दबाव डालना सब हराम।
—
🕊️ 5️⃣ किससे दुश्मनी रखने की अनुमति है?
कुरआन केवल ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ खड़े होने का हुक्म देता है — इंसान के खिलाफ़ नहीं।
> “अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता।” 📖 सूरह आल-इमरान 3:57
यानी: ✔ जो इंसाफ़ करे — वह हमारा भाई ❌ जो ज़ुल्म करे — उसके खिलाफ़ खड़े होना फ़र्ज़
मजहब देखकर नहीं अच्छाई–बुराई देखकर फैसला।
—
🧠 अंतिम हुक्म — सच्चा मुसलमान कौन है?
कुरआन कहता है:
> “और हमने तुम्हें दुनिया के लिए रहमत (रहमत का ज़रिया) बनाया।” 📖 सूरह अल-अंबिया 21:107
नबी ﷺ ने कहा:
> सबसे अच्छा इंसान वो है जो इंसानों को फ़ायदा पहुँचाए। 📚 अल-मु‘जम अल-अउसत
इसका मतलब: ✔ मुसलमान दुनिया के लिए रहमत है ✔ इंसानों की भलाई के लिए आया है ✔ नफ़रत फैलाने के लिए नहीं
—
🔥 पूरा निष्कर्ष
असली कुरआनी मुसलमान गलत सोच वाला
इंसाफ़ चाहता है नफ़रत रखता है हर इंसान से अच्छा व्यवहार दूसरों को नीचा समझता अच्छाई फैलाता है फसाद फैलाता है अमन और शांति का पैग़ाम झगड़े का पैग़ाम इंसानों की भलाई चाहता है बदले का विचार
👉 कुरआन की सही समझ रखने वाला मुसलमान किसी इंसान या मज़हब से नफ़रत नहीं कर सकता। वह सिर्फ़ ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा होता है — बगैर नफ़रत के।
दुनिया के इंसान के लिए दिन मुकम्मल हो गया है सिर्फ मुसलमानो के लिए नहीं बताया गया है। 🔹 1️⃣ Islamic Law (शरीअत) — कुरआन में क्या बताया गया है
शरीअत = वो पूरी व्यवस्था जिसमें इंसान की पूरी जिंदगी अल्लाह के हुक्म के मुताबिक चलती है — चाहे वो इबादत हो, परिवार हो, कारोबार हो, रिश्ते हों, या समाज।
📌 कुरआन कहता है
> “आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी।” (Qur'an 5:3)
यानी अल्लाह का क़ानून — परफेक्ट और पूरी तरह से इंसान की भलाई पर आधारित है।
शरीअत किन चीज़ों को कवर करती है
विषय कुरआनी हिदायत
इबादत नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज परिवार निकाह, तलाक, बच्चों की परवरिश समाज इंसाफ, अमानत, हक़ूक़, पड़ोसी कारोबार हलाल व्यापार, सूद (ब्याज) से बचना न्याय गुनाह की सज़ा, ज़ुल्म की मनाही सरकार सलाह (शूरा) आधारित सिस्टम, तानाशाही की मनाही
उदाहरण
📍 ज़कात — अमीर से लेकर गरीब तक पहुंचाने की व्यवस्था
> “ज़कात गरीबों, मुहताजों और मुसाफिरों के लिए है।” (Qur'an 9:60)
📍 कारोबार में चीटिंग की मनाही
> “नाप-तौल में कमी मत करो।” (Qur'an 83:1–3)
📍 न्याय में पक्षपात की मनाही
> “इंसाफ करो, चाहे फैसले के खिलाफ़ तुम्हारा अपना रिश्ता क्यों न हो।” (Qur'an 4:135)
—
🔹 2️⃣ Islamic Theology (अक़ीदाह) — कुरआन में क्या बताया गया है
अक़ीदाह = ईमान की बुनियादी नींव।
क़ुरआन के मुताबिक अक़ीदाह के 6 मूल हिस्से
हिस्सा मतलब
1 अल्लाह पर ईमान 2 फ़रिश्तों पर ईमान 3 अल्लाह की किताबों पर ईमान 4 तमाम नबियों पर ईमान 5 क़यामत और हिसाब-किताब पर ईमान 6 तक़दीर (अल्लाह का फैसला) पर ईमान
कुरआन की दलील
> “ईमान वाले वो हैं जो अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं।” (Qur'an 2:285)
अक़ीदाह की सबसे अहम बात
> “अल्लाह एक है और उसी की इबादत करो।” (Qur'an 112:1)
—
🔥 शरीअत (Law) + अक़ीदाह (Theology) — दोनों क्यों ज़रूरी
सिर्फ अक़ीदाह हो लेकिन शरीअत न हो ➝ ईमान अधूरा सिर्फ शरीअत हो लेकिन अक़ीदाह न हो ➝ इबादत बेकार
उदाहरण:
स्थिति नतीजा
मेहनत और ईमान दोनों जन्नत इबादत लेकिन नीयत गलत नामंज़ूर ईमान का दावा लेकिन दीन पर अमल नहीं खोखला
—
🌟 इस्लाम का मॉडल: दीन पूरी जिंदगी का सिस्टम
कुरआन के मुताबिक:
क्षेत्र मक़सद
इंसान अल्लाह का बंदा बनना घर मोहब्बत और जिम्मेदारी समाज इंसाफ अर्थव्यवस्था हलाल और बिना शोषण राजनीति सलाह आधारित सिस्टम, तानाशाही नहीं दुनिया अमन और भाईचारा
कुरआन की कुल हिदायत 👇
> “अल्लाह न्याय, भलाई और रिश्तेदारी निभाने का हुक्म देता है।” (Qur'an 16:90)
—
✨ अंतिम नतीजा
🔹 Islamic Law = इंसान की जिंदगी को चलाने के नियम 🔹 Theology = ईमान की बुनियाद
दोनों मिलकर इस्लाम का पूर्ण और संतुलित जीवन सिस्टम बनाते हैं — जो इंसाफ, रहमत, अमन और इंसानी इज़्ज़त पर आधारित है।
Everything is under His knowledge, control & vision.
All praise belongs to Allah Alone
All power and all dominion.
Allah created every existing being,
Allah is Not like any created thing.
Our Lord is Allah SWT. There is no 'True God' / 'True Ilah except Allah. Allah is Exalted Above ‘Arsh, above the heaven. Holy Qur'an is Allah's Word and final revelation for mankind. Allah is the One and Unique True Deity'. None is worthy of worship except Allah. Muhammad PBUH is Allah's servant and messenger ❤❤❤
Rothchild/Freemasonry (Do as thou wilt), CIA/Mossad (By way of deception, thou shalt do war), Christopher Columbus, Napoleon Bonaparte, Winston Churchill, Benjamin Netanyahu, Rupert Murdoch, Itamar Ben-Gvir, Tony Blair, Keir Starmer, Bill Clinton, George W. Bush, Joe Biden, Barack Obama, Donald Trump, Uncle Sam, Narendra Modi, Rishi Sunak, Zion1st lobby, Bharatiya Janata Party/Hindutva, Bohemian Grove, Pizzagate, Hollywood, Disney, Nickelodeon, Bollywood, Elon Musk, Les Wexner, Jeffrey Epstein, Harvey Weinstein, Jimmy Savile, Dan Schneider, Simon Cowell, Teb Bundy, Jay Z, P Diddy, Bryan Christopher Williams, Christopher Sabat, etc.
☝️✅🌍 👁️👁️🧠 क्या कुरआन का इल्म रखने वाला एक सच्चा मुसलमान किसी इंसान या मज़हब के खिलाफ़ हो सकता है?
कुरआन का जवाब बिल्कुल साफ़ है 👇
❌ 1️⃣ किसी इंसान से नफ़रत करना — कुरआन के खिलाफ़
कुरआन कहता है:
> “किसी क़ौम की दुश्मनी भी तुम्हें इस बात पर न उकसाए कि तुम इंसाफ़ छोड़ दो। इंसाफ़ करो — यही तक़वा के ज़्यादा करीब है।”
📖 सूरह अल-माइदा 5:8
यानी: ✔ दूसरे धर्म के लोग हों
✔ दुश्मन हों
✔ बुराई करने वाले हों
फिर भी नफरत नहीं — इंसाफ़।
कुरआन ऐसा मुसलमान पसंद करता है जो: ❌ नफ़रत न रखे
✔ इंसाफ़ रखे
✔ हक़ बात रखे
✔ अच्छाई फैलाए
—
❌ 2️⃣ मज़हब से नफ़रत करना — कुरआन के खिलाफ़
कुरआन के मुताबिक मुसलमान को यह हक़ नहीं कि वह किसी मजहब के खिलाफ़ नफ़रत फैले।
अल्लाह कहता है:
> “तुम उन लोगों के (मज़हबी) पूज्यों को बुरा न कहो जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं।”
📖 सूरह अल-अनआम 6:108
यानी दूसरों के मजहब और धार्मिक मान्यताओं को बुरा कहना पूरी तरह मना है।
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🌍 3️⃣ कुरआन की राह — नफ़रत नहीं, दावत और अमन
कुरआन कहता है:
> “अपने रब के रास्ते की तरफ़ हिकमत और अच्छी नसीहत से बुलाओ — और उनसे अच्छे तरीके से बहस करो।”
📖 सूरह अन-नहल 16:125
मतलब: ✔ दावत दो
✔ प्यार से बात करो
✔ अच्छाई समझाओ
✔ किसी का दिल मत दुखाओ
—
❌ 4️⃣ मुसलमान को ज़बरदस्ती का हक़ नहीं
कुरआन बहुत स्पष्ट कहता है:
> “दीन (मजहब) में कोई ज़बरदस्ती नहीं।”
📖 सूरह अल-बक़रह 2:256
यानी: ❌ किसी को धर्म बदलने पर मजबूर करना
❌ धमकी देना
❌ दबाव डालना
सब हराम।
—
🕊️ 5️⃣ किससे दुश्मनी रखने की अनुमति है?
कुरआन केवल ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ खड़े होने का हुक्म देता है — इंसान के खिलाफ़ नहीं।
> “अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता।”
📖 सूरह आल-इमरान 3:57
यानी: ✔ जो इंसाफ़ करे — वह हमारा भाई
❌ जो ज़ुल्म करे — उसके खिलाफ़ खड़े होना फ़र्ज़
मजहब देखकर नहीं
अच्छाई–बुराई देखकर फैसला।
—
🧠 अंतिम हुक्म — सच्चा मुसलमान कौन है?
कुरआन कहता है:
> “और हमने तुम्हें दुनिया के लिए रहमत (रहमत का ज़रिया) बनाया।”
📖 सूरह अल-अंबिया 21:107
नबी ﷺ ने कहा:
> सबसे अच्छा इंसान वो है जो इंसानों को फ़ायदा पहुँचाए।
📚 अल-मु‘जम अल-अउसत
इसका मतलब: ✔ मुसलमान दुनिया के लिए रहमत है
✔ इंसानों की भलाई के लिए आया है
✔ नफ़रत फैलाने के लिए नहीं
—
🔥 पूरा निष्कर्ष
असली कुरआनी मुसलमान गलत सोच वाला
इंसाफ़ चाहता है नफ़रत रखता है
हर इंसान से अच्छा व्यवहार दूसरों को नीचा समझता
अच्छाई फैलाता है फसाद फैलाता है
अमन और शांति का पैग़ाम झगड़े का पैग़ाम
इंसानों की भलाई चाहता है बदले का विचार
👉 कुरआन की सही समझ रखने वाला मुसलमान किसी इंसान या मज़हब से नफ़रत नहीं कर सकता।
वह सिर्फ़ ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा होता है — बगैर नफ़रत के।
दुनिया के इंसान के लिए दिन मुकम्मल हो गया है सिर्फ मुसलमानो के लिए नहीं बताया गया है।
🔹 1️⃣ Islamic Law (शरीअत) — कुरआन में क्या बताया गया है
शरीअत = वो पूरी व्यवस्था जिसमें इंसान की पूरी जिंदगी अल्लाह के हुक्म के मुताबिक चलती है —
चाहे वो इबादत हो, परिवार हो, कारोबार हो, रिश्ते हों, या समाज।
📌 कुरआन कहता है
> “आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी।”
(Qur'an 5:3)
यानी अल्लाह का क़ानून — परफेक्ट और पूरी तरह से इंसान की भलाई पर आधारित है।
शरीअत किन चीज़ों को कवर करती है
विषय कुरआनी हिदायत
इबादत नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज
परिवार निकाह, तलाक, बच्चों की परवरिश
समाज इंसाफ, अमानत, हक़ूक़, पड़ोसी
कारोबार हलाल व्यापार, सूद (ब्याज) से बचना
न्याय गुनाह की सज़ा, ज़ुल्म की मनाही
सरकार सलाह (शूरा) आधारित सिस्टम, तानाशाही की मनाही
उदाहरण
📍 ज़कात — अमीर से लेकर गरीब तक पहुंचाने की व्यवस्था
> “ज़कात गरीबों, मुहताजों और मुसाफिरों के लिए है।” (Qur'an 9:60)
📍 कारोबार में चीटिंग की मनाही
> “नाप-तौल में कमी मत करो।” (Qur'an 83:1–3)
📍 न्याय में पक्षपात की मनाही
> “इंसाफ करो, चाहे फैसले के खिलाफ़ तुम्हारा अपना रिश्ता क्यों न हो।”
(Qur'an 4:135)
—
🔹 2️⃣ Islamic Theology (अक़ीदाह) — कुरआन में क्या बताया गया है
अक़ीदाह = ईमान की बुनियादी नींव।
क़ुरआन के मुताबिक अक़ीदाह के 6 मूल हिस्से
हिस्सा मतलब
1 अल्लाह पर ईमान
2 फ़रिश्तों पर ईमान
3 अल्लाह की किताबों पर ईमान
4 तमाम नबियों पर ईमान
5 क़यामत और हिसाब-किताब पर ईमान
6 तक़दीर (अल्लाह का फैसला) पर ईमान
कुरआन की दलील
> “ईमान वाले वो हैं जो अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं।”
(Qur'an 2:285)
अक़ीदाह की सबसे अहम बात
> “अल्लाह एक है और उसी की इबादत करो।”
(Qur'an 112:1)
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🔥 शरीअत (Law) + अक़ीदाह (Theology) — दोनों क्यों ज़रूरी
सिर्फ अक़ीदाह हो लेकिन शरीअत न हो ➝ ईमान अधूरा
सिर्फ शरीअत हो लेकिन अक़ीदाह न हो ➝ इबादत बेकार
उदाहरण:
स्थिति नतीजा
मेहनत और ईमान दोनों जन्नत
इबादत लेकिन नीयत गलत नामंज़ूर
ईमान का दावा लेकिन दीन पर अमल नहीं खोखला
—
🌟 इस्लाम का मॉडल: दीन पूरी जिंदगी का सिस्टम
कुरआन के मुताबिक:
क्षेत्र मक़सद
इंसान अल्लाह का बंदा बनना
घर मोहब्बत और जिम्मेदारी
समाज इंसाफ
अर्थव्यवस्था हलाल और बिना शोषण
राजनीति सलाह आधारित सिस्टम, तानाशाही नहीं
दुनिया अमन और भाईचारा
कुरआन की कुल हिदायत 👇
> “अल्लाह न्याय, भलाई और रिश्तेदारी निभाने का हुक्म देता है।”
(Qur'an 16:90)
—
✨ अंतिम नतीजा
🔹 Islamic Law = इंसान की जिंदगी को चलाने के नियम
🔹 Theology = ईमान की बुनियाद
दोनों मिलकर इस्लाम का पूर्ण और संतुलित जीवन सिस्टम बनाते हैं —
जो इंसाफ, रहमत, अमन और इंसानी इज़्ज़त पर आधारित है।
Dear ,hHow are you ?
ALLAH Save you
Allah Almighty Exalted Above the heaven
Above His 'Arsh: (Above The Greatest Throne),
Everything is under His knowledge, control & vision.
All praise belongs to Allah Alone
All power and all dominion.
Allah created every existing being,
Allah is Not like any created thing.
Our Lord is Allah SWT. There is no 'True God' / 'True Ilah except Allah. Allah is Exalted Above ‘Arsh, above the heaven. Holy Qur'an is Allah's Word and final revelation for mankind. Allah is the One and Unique True Deity'. None is worthy of worship except Allah. Muhammad PBUH is Allah's servant and messenger ❤❤❤
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Rothchild/Freemasonry (Do as thou wilt), CIA/Mossad (By way of deception, thou shalt do war), Christopher Columbus, Napoleon Bonaparte, Winston Churchill, Benjamin Netanyahu, Rupert Murdoch, Itamar Ben-Gvir, Tony Blair, Keir Starmer, Bill Clinton, George W. Bush, Joe Biden, Barack Obama, Donald Trump, Uncle Sam, Narendra Modi, Rishi Sunak, Zion1st lobby, Bharatiya Janata Party/Hindutva, Bohemian Grove, Pizzagate, Hollywood, Disney, Nickelodeon, Bollywood, Elon Musk, Les Wexner, Jeffrey Epstein, Harvey Weinstein, Jimmy Savile, Dan Schneider, Simon Cowell, Teb Bundy, Jay Z, P Diddy, Bryan Christopher Williams, Christopher Sabat, etc.
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Mashallah good marvelous Islamic inqalabi channel mashallah good ❤❤❤❤😂😂🎉🎉😢😢😢😮😮😅😅😊😊
❤❤❤❤
Thank you for your great work. Jazaq Allah Khair. Keep it up ❤
❤❤ Mashallah 💓💓
ALLAH IS GREATEST ☝
Dr Zakir Naik is a true Islamic scholar ❤❤❤
Love from Pakistan.
First comment ❤❤❤
Love your videos Dr.Zakir Naik sir❤❤🎉🎉