VideosZakir Naik

The Sin of Adam and Eve in Islam and Christianity and the High Position of the Mother in Islam



The Sin of Adam and Eve in Islam and Christianity and the High Position of the Mother in Islam – Dr Zakir Naik

#zakirnaik #drzakirnaik #Adam #Eve

Follow us in :

source

Related Articles

7 Comments

  1. Assalam-o-Alaikum,
    I pray this message finds you in good health and strong iman. There is someone I love sincerely and want to do Nikkah as soon as possible but facing issues.

    I humbly ask you to keep us in your duas, that Allah makes her my naseeb and grants us the blessing of nikkah, inshallah. May Allah forgive all your sins, shower you with His mercy, and accept your prayers.

    Your sincere duas, even if small, can make a big difference. Allah alone is the Best of Planners and the Most Generous. Please remember us in your prayers.

    Jazakallah khair.

  2. لا اله الا الله الله اكبر الله کی جنت میں سردار رقيه رضى الله عنها بنت محمد رسول الله صلى الله عليه و سلم سردار عيسى صلى الله عليه و سلم كى امى سردار مريم رضى الله عنها سردار آسيه رضى الله عنها سردار فداء الله حفظه الله کی بیویاں ھیں

  3. لا اله الا الله الله اكبر الله کی جنت میں سردار رقيه رضى الله عنها بنت محمد رسول الله صلى الله عليه و سلم سردار عيسى صلى الله عليه و سلم كى امى سردار مريم رضى الله عنها سردار آسيه رضى الله عنها سردار فداء الله حفظه الله کی بیویاں ھیں

  4. भारत के संविधान की “मूल बातें” (Main Principles) को समझने के बाद पूछा कि —
    👉 इन सिद्धांतों के मुताबिक, अल्लाह तआला ने कुरआन में क्या हिदायत (Guidance) दी है?

    तो चलिए, एक-एक करके देखते हैं कि भारत के संविधान के ये सिद्धांत कुरआन की हिदायतों से कैसे मेल खाते हैं।
    इससे आपको समझ आएगा कि कुरआन और संविधान दोनों इंसाफ, अमन और इंसानियत की राह दिखाते हैं।

    📖 भारत के संविधान की मूल बातें और कुरआन की हिदायतें

    1️⃣ सार्वभौमिकता (Sovereignty)

    संविधान कहता है कि भारत स्वतंत्र और किसी पर निर्भर नहीं है।
    कुरआन कहता है — असल हकूमत सिर्फ अल्लाह की है, और इंसान को ज़मीन पर "ख़लीफ़ा" यानी प्रतिनिधि बनाया गया है।

    > وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ
    “आसमानों और ज़मीन की बादशाहत अल्लाह ही के लिए है।”
    (सूरह आल-इमरान 3:189)

    📘 मतलब: जैसे संविधान इंसानों को स्वतंत्र बनाता है, वैसे ही कुरआन इंसान को अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी से आज़ाद करता है।

    2️⃣ समाजवाद (Socialism)

    संविधान समान अवसर और अमीरी-गरीबी के फर्क को घटाने की बात करता है।
    कुरआन में भी यही हुक्म है कि माल और दौलत सिर्फ अमीरों में ही न घूमे:

    > كَيْ لَا يَكُونَ دُولَةً بَيْنَ الْأَغْنِيَاءِ مِنكُمْ
    “ताकि दौलत सिर्फ तुम्हारे अमीरों के बीच ही न घूमे।”
    (सूरह हश्र 59:7)

    📘 मतलब: कुरआन समाज में इंसाफ, बराबरी और आर्थिक संतुलन की शिक्षा देता है।

    3️⃣ धर्मनिरपेक्षता (Secularism)

    संविधान कहता है कि राज्य का कोई धर्म नहीं; सब धर्मों को समान सम्मान।
    कुरआन में भी “धर्म की आज़ादी” की साफ़ हिदायत है:

    > لَا إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ
    “धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं।”
    (सूरह अल-बक़रह 2:256)

    📘 मतलब: किसी को भी मजबूर नहीं किया जा सकता कि वो कौन-सा धर्म माने।

    4️⃣ लोकतंत्र (Democracy)

    संविधान कहता है कि सत्ता जनता की होती है, और निर्णय सलाह से किए जाते हैं।
    कुरआन भी सलाह और मशवरे पर ज़ोर देता है:

    > وَأَمْرُهُمْ شُورَى بَيْنَهُمْ
    “उनके सभी काम आपसी मशवरे से तय होते हैं।”
    (सूरह अश-शूरा 42:38)

    📘 मतलब: कुरआन भी लोकतांत्रिक सिद्धांत देता है — हुकूमत सलाह और इंसाफ पर चले।

    5️⃣ समानता (Equality)

    संविधान हर नागरिक को बराबर अधिकार देता है।
    कुरआन कहता है कि अल्लाह के सामने सब बराबर हैं — कोई ऊँच-नीच नहीं।

    > إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ
    “अल्लाह के नज़दीक सबसे इज़्ज़तदार वही है जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार है।”
    (सूरह हुजुरात 49:13)

    📘 मतलब: नस्ल, जाति, भाषा या धन से नहीं, बल्कि नेक अमल से इंसान की इज़्ज़त तय होती है।

    6️⃣ न्याय (Justice)

    संविधान का मूल उद्देश्य न्याय है।
    कुरआन में अल्लाह बार-बार हुक्म देते हैं कि इंसाफ करो — चाहे अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।

    > إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالإِحْسَانِ
    “अल्लाह इंसाफ और भलाई का हुक्म देता है।”
    (सूरह नहल 16:90)

    📘 मतलब: कुरआन इंसाफ को समाज की बुनियाद मानता है।

    7️⃣ कर्तव्य (Duties)

    संविधान नागरिकों को देशभक्ति, सम्मान और एकता का कर्तव्य सिखाता है।
    कुरआन में भी यही हुक्म है:

    > وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا
    “सब मिलकर अल्लाह की रस्सी (हिदायत) को मज़बूती से पकड़ लो और आपस में मत बँटो।”
    (सूरह आल-इमरान 3:103)

    📘 मतलब: कुरआन इंसानों में एकता, भाईचारा और ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करता है।

    8️⃣ संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of Law)

    संविधान से ऊपर कोई नहीं।
    कुरआन भी यही कहता है कि अल्लाह का हुक्म सबसे ऊँचा है:

    > إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ
    “हुक्म देना तो बस अल्लाह का काम है।”
    (सूरह यूसुफ 12:40)

    📘 मतलब: जैसे संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, वैसे ही कुरआन इंसानों के लिए सर्वोच्च हिदायत है।

    🔹 नतीजा (Conclusion)

    भारत का संविधान और कुरआन दोनों:

    इंसाफ (Justice)

    बराबरी (Equality)

    आज़ादी (Freedom)

    भाईचारा (Fraternity)

    और अमन (Peace)
    की तालीम देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Back to top button