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True Happiness is Exclusively Found in Following the Guidelines of the Quran and Sunnah -Zakir Naik

True Happiness is Exclusively Found in Following the Guidelines of the Quran and Sunnah – Dr Zakir Naik
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Jazak Allaahu Khayran
☝️✅🌍👁️👁️🧠अल्लाह इंसान को बे मकसद नहीं बनाए है।
जो ज्यादा फेकने माहिर है आज उन्हें बेचैनी है पुछलो। ☝️✅🌍 “True Happiness is Exclusively Found in Following the Guidelines of the Qur’an and Sunnah” — विस्तृत जानकारी
असली और सच्ची खुशी (True Happiness) वह नहीं है जो सिर्फ़ धन, शोहरत, मज़ा, पद, या दुनिया की सुविधाओं में मिले। ये सब राहत तो देती हैं, लेकिन दिल को सुकून, रूह की आराम, और जिंदगी की स्थिर खुशी नहीं देती।
इस्लाम यह हकीकत बताता है कि इंसान की फ़ितरत (Nature) को अल्लाह ने बनाया, और उसी फ़ितरत के हिसाब से हिदायत—कुरआन और सुन्नत—भी उतारी।
इसलिए जो इंसान कुरआन और सुन्नत के अनुसार चलेगा वह अपनी फ़ितरत के मुताबिक ज़िंदगी बिताएगा, और यही उसके दिल और दिमाग की असली खुशी का रास्ता है।
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🔹 1. कुरआन में असली खुशी कहाँ है
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:
“जो लोग ईमान लाए और दिलों को अल्लाह की याद से सुकून मिलता है। सुन लो, अल्लाह की याद से ही दिलों को सुकून मिलता है।”
— कुरआन 13:28
📌 मतलब: असली सुकून सिर्फ़ अल्लाह की याद, ईमान और उसकी हिदायत पर चलने में है।
एक और जगह:
“जो कोई नेक अमल करेगा — मर्द हो या औरत — और ईमान वाला हो, उसे हम दुनिया में भी पाकीज़ा ज़िंदगी देंगे और आख़िरत में बेहतर बदला देंगे।”
— कुरआन 16:97
📌 दुनिया की भी खुशी + आख़िरत की भी कामयाबी, दोनों सिर्फ़ कुरआन और सुन्नत में हैं।
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🔹 2. सुन्नत के मुताबिक जिंदगी = बेहतरीन जिंदगी
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“मूमिन का मामला अजब है — उसकी हर बात में भलाई है।”
— सहीह मुस्लिम
📌 वह खुश हो तो शुक्र करता है → खुशी बढ़ती है
📌 वह परेशान हो तो सब्र करता है → ग़म भी उसे सवाब और राहत देता है
यह जिंदगी का फॉर्मूला सिर्फ़ कुरआन और सुन्नत में मिलता है।
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🔹 3. क्यों खुशी सिर्फ़ कुरआन और सुन्नत में है?
दुनिया कुरआन व सुन्नत
अस्थायी स्थायी
मिल भी जाए तो डर लगा रहता है दिल को यकीन और इत्मिनान
गुनाह → अंदर बेचैनी नेकी → अंदर सुख
भटकाव हिदायत
अहंकार और तुलना शुकर और क़ना’अत
🔸 गुनाह में कभी सुकून नहीं होता — चाहे बाहर से मुस्कुराहट हो।
🔸 नेकी और ईमान में हमेशा सुकून होता है — चाहे दुनिया कठिन हो।
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🔹 4. कुरआन और सुन्नत क्या सिखाते हैं जिससे खुशी मिलती है
हिदायत मनोवैज्ञानिक फायदा
नमाज़ चिंता और तनाव खत्म
तौबा ग़म और अपराधबोध खत्म
सब्र मुश्किलों को आसान महसूस करना
शुक्र दिल में खुशी और तसल्ली
दुआ उम्मीद और आत्मिक सहारा
हलाल कमाई ज़हन में सुकून
ग़ीबत, नफ़रत, फसाद से दूरी इंसानों से अच्छे रिश्ते
यह खुशी की मनोवैज्ञानिक-भावनात्मक संपूर्ण थेरेपी है।
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🔹 5. आज दुनिया में डिप्रेशन बढ़ रहा है — क्यों?
क्योंकि दुनिया यह सिखा रही है:
मनचाहा करो
मज़ा ढूंढो
पैसा कमाओ
खुद को ख़ुश रखो
लेकिन जितना इंसान खुद को खुश करने की कोशिश करता है — उतना खाली होता जाता है।
और कुरआन कहता है:
अल्लाह की खुश करो
नफ्स को काबू करो
गुनाह से बचो
इंसानों के लिए रहमत बनो
📌 यही तरीका इंसान को खुद-ब-खुद खुश कर देता है।
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🔹 6. असली और झूठी खुशी का फ़र्क
झूठी खुशी असली खुशी
मज़े सुकून
चमक रूह का आराम
दिखावा भीतर की शांति
तीखा लुफ्त लम्बी राहत
रात में बेचैनी रात में नींद
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🔹 7. अंतिम नतीजा
असली खुशी तभी मिलती है जब इंसान:
✔ अल्लाह पर ईमान लाए
✔ कुरआन की हिदायत को स्वीकार करे
✔ सुन्नत के अनुसार जीवन जीए
क्योंकि जिस अल्लाह ने हमें बनाया है — वही बताता है कि हमें कैसे जीना चाहिए।
इसलिए:
🌙 दुनिया में सुकून + दिल में खुशी + दिमाग में स्थिरता + रूह में आराम
➡ सिर्फ़ कुरआन और सुन्नत के रास्ते में है।
📌 सूरह अल-आराफ़ 7:156 — रहमत और बरकत की दुआ
🔹 अरबी (मूल)
وَاكْتُبْ لَنَا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ ۖ إِنَّا هُدْنَا إِلَيْكَ
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🔹 हिंदी लफ़्ज़ों में (तलफ़्फ़ुज़)
वक्तुब लना फ़ी हाज़िहिद् दुन्या हसना वफ़िल आख़िरति — इन्ना हुद्ना इलैक
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🔹 हिंदी मतलब
और हमारे लिए इस दुनिया में भी भलाई लिख दे और आख़िरत में भी।
निस्संदेह, हम केवल तेरी ही तरफ लौट आए (तौबा की)।
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🌙 इस दुआ का सबक और फज़ीलत
यह दुआ कुरआन सिखाती है 👇 ✔ दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगना
✔ बरकत, रहमत और आसानी का सवाल करना
✔ अल्लाह की तरफ सच्चे दिल से लौटना (तौबा)
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💡 कब पढ़ना फ़ज़ीलत वाला है?
◾ रोज़ाना सुबह–शाम
◾ नमाज़ के बाद दुआ में
◾ किसी नई शुरुआत या काम के वक़्त
◾ मुश्किल हालात और तंगी में
◾ गुनाहों से तौबा के बाद
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🌟 इस दुआ में क्या सब शामिल है?
इस दुआ में ये सब माँग लिया जाता है 👇
✔ रिज़्क़ में बरकत
✔ घर में सुकून
✔ कारोबार में तरक्की
👇👇👇👇👇
✔ औलाद और रिश्तों में नेकी
✔ दीन पर मज़बूती
✔ मौत ईमान पर और आख़िरत में फ़तह
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