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Unique Features of the Genuine God – Dr Zakir Naik



Unique Features of the Genuine God – Dr Zakir Naik

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  1. अल्लाह ने खुद अपना नाम दिए है की दुनिया के इंसान हमे यानी अल्लाह को अल्लाह नाम पुकारो
    अल्लाह कुरआन मे क्या हिदायत दिए है।👇👇👇👇
    क़ुरआन में अल्लाह ने खुद यह हिदायत दी है कि दुनिया के लोग उसे “अल्लाह” नाम से पुकारें, क्योंकि यही उसका असल, ख़ास, और सबसे ऊँचा नाम है।
    क़ुरआन में कई आयतें इस बात की पुष्टि करती हैं।

    नीचे साफ़–साफ़ आयतों के साथ हिदायत पेश है:

    ✅ **1. “अल्लाह”— यही मेरा (रब का) असली नाम है

    — सूरह ताहा 20:14**

    📖 अरबी

    إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي

    📖 हिंदी

    “निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई माबूद नहीं, इसलिए मेरी ही इबादत करो।”

    ➡ इस आयत में अल्लाह ने खुद अपना नाम “अल्लाह” बताकर आदेश दिया:

    इसी नाम से पुकारो

    इसी की इबादत करो

    ✅ **2. अल्लाह कहो या रहमान—दोनों उससे ही हैं

    — सूरह इसरा 17:110**

    📖 अरबी

    قُلِ ادْعُوا اللَّهَ أَوِ ادْعُوا الرَّحْمَـٰنَ ۖ أَيًّا مَّا تَدْعُوا فَلَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ

    📖 हिंदी

    “कह दीजिए: (उसे) ‘अल्लाह’ कहो या ‘रहमान’ कहो — जो नाम चाहो पुकारो, उसके सब अच्छे नाम हैं।”

    ➡ यह आयत बताती है:

    अल्लाह का मुख्य नाम “अल्लाह” है

    उसके बाकी नाम (रहमान, रहीम, गफ़ूर…) सिफ़ात (गुणों) के नाम हैं

    लेकिन पुकारना अल्लाह नाम से ही बेहतर है।

    ✅ **3. अल्लाह—सब नामों में सबसे बड़ा नाम

    — सूरह हशर 59:22–24**

    इन आयतों में बार–बार “अल्लाह” नाम आया है और उसके 14 से ज्यादा सिफ़ाती नाम भी बताए गए हैं।

    ➡ यहाँ यह साफ़ है कि
    “अल्लाह” मूल नाम है
    और बाकी सब उसके अच्छे गुणों के नाम हैं।

    ✅ **4. दुआ, इबादत, नमाज़ में “अल्लाह” नाम

    — सूरह फ़ातिहा 1:1**

    📖 अरबी

    الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ

    ➡ पहली ही आयत में “अल्लाह” नाम सिखाया गया, ताकि हर मुसलमान इसी नाम से रब को पुकारे।

    🔍 सवाल: क्या अल्लाह ने खुद इंसानों को कहा कि मुझे “अल्लाह” नाम से पुकारो?

    ✔ हाँ, बिल्कुल।

    सबसे साफ़ प्रमाण: सूरह ताहा 20:14

    > إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ
    “मैं ही अल्लाह हूँ…”

    यह सीधा आदेश है कि
    रब का नाम “अल्लाह” है और इंसान उसी नाम से उसे पुकारें।

    और दूसरी आयत (17:110) में यह भी सिखाया कि
    सभी अच्छे नाम उसी के हैं, लेकिन मूल नाम—अल्लाह।

    🌟 नतीजा (सार)

    कुरआन में अल्लाह की यह हिदायत मौजूद है कि:

    ✔ “अल्लाह” उसका असल नाम है

    ✔ इंसान उससे “अल्लाह” नाम से दुआ करे

    ✔ इबादत, नमाज़, तस्बीह — सब उसी नाम से

    ✔ बाकी नाम उसके गुण हैं, लेकिन बुलाना “अल्लाह” कहना ही बेहतरीन

  2. सूरह अत-तौबा (Surah 9), आयत 119 का अरबी, हिंदी अनुवाद, और विस्तृत तफ़्सीर (व्याख्या) प्रस्तुत है:
    🌙 سورة التوبة – آيت 119
    📌 आयत का अरबी पाठ

    يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَكُونُوا مَعَ الصَّادِقِينَ
    📌 हिंदी अनुवाद

    “ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो, और सच्चों के साथ हो जाओ।”
    📖 विस्तृत तफ़्सीर व हिदायत

    ⭐ 1. “अल्लाह से डरो” — (اتَّقُوا اللَّهَ)

    यहाँ "तक़वा" का आदेश दिया गया है।

    तक़वा का मतलब:

    अल्लाह की नाफ़रमानियों से बचना

    उसके हुक्मों पर चलना

    गुनाह से बचने की कोशिश करना

    अपने दिल, ज़बान, आँख, हाथ–पाँव को गुनाह से रोकना

    तक़वा इंसान को दुनिया और आख़िरत में सबसे मज़बूत सुरक्षा देता है।

    ⭐ 2. “सच्चों के साथ रहो” — (وَكُونُوا مَعَ الصَّادِقِينَ)

    सच्चों से मुराद:

    ईमान में सच्चे लोग

    अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों में सच्चे

    बात, नीयत और अमल में सच्चाई वाले

    निफ़ाक़ (दिखावा व पाखंड) से दूर रहने वाले

    यह आदेश इसलिए दिया गया है ताकि:

    इंसान झूठ, धोखा और पाखंड से बच सके

    सही रास्ते पर चलने वाले लोगों की सोहबत (company) उसे सही राह पर रखे

    दिल मज़बूत हो और ईमान बढ़े

    🔍 आयत का पृष्ठभूमि (Context)

    तफ़्सीर में आता है कि यह आयत ग़ज़वा-ए-तबूक के बाद नाज़िल हुई।

    तीन सहाबियों ने जिहाद से पीछे रहने की वजह में झूठ नहीं बोला और
    सच बोल दिया, जबकि दूसरे लोग बहाने बनाकर बच निकले।

    अल्लाह ने इन तीन सच्चे लोगों की तौबा कबूल की, और इसी के बाद यह आयत नाज़िल हुई:

    👉 सच्चाई ही इंसान को राहत दिलाती है
    👉 झूठ इंसान को हलाक़ कर देता है
    💡 इस आयत की मुख्य हिदायतें

    ✔ 1. हमेशा अल्लाह का डर दिल में ज़िंदा रखो

    अगर तक़वा है, तो गुनाह अपने-आप दूर होता है।

    ✔ 2. जिंदगी में सच्चे लोगों की सोहबत चुने

    क्योंकि:

    जिसकी सोहबत अच्छी, उसका रास्ता अच्छा

    जिसकी सोहबत झूठे लोग, वह रास्ते से भटकता है

    ✔ 3. झूठ, फरेब, दो-मुँही बातें, धोखा—सब से दूर रहना

    यह पाखंड (निफ़ाक़) की तरफ ले जाता है।

    ✔ 4. मुसलमान का असली हथियार “सच्चाई और अमानतदारी” है

    रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
    "सच्चाई नेकी की तरफ ले जाती है और नेकी जन्नत की तरफ"
    🌟 सार

    यह आयत हमें दो बड़ी बातें सिखाती है:

    (1) तक़वा:

    अल्लाह से डरते हुए उसकी नाफ़रमानी से दूर रहो।

    (2) सच्चाई:

    दिल, ज़बान और अमल से सच्चे बनो और झूठे-पाखंडी लोगों की सोहबत से दूर रहो।

  3. क़ुरआन में इंसान को इंसान या किसी और मख़लूक़ (पत्थर, मूर्ति, कब्र, पेड़, सूरज, चाँद, औलिया, फ़रिश्ते) के बराबर खुदा (माबूद) बनाकर इबादत करने को सबसे बड़ा ज़ुल्म और जाहिलियत** कहा गया है।
    क़ुरआन इसे शिर्क कहता है, और यह अंधकार (ظُلُمَات) और गुमराही की सबसे गहरी हालत है।

    नीचे मैंने इस मसले पर कुरआन की सीधी हिदायतें अरबी + हिंदी अर्थ + तफ़्सीर के साथ दी हैं:

    🔥 1. सबसे बड़ा गुनाह — शिर्क (किसी को अल्लाह का साझी बनाना)

    📖 सूरह लुक़मान 31:13

    إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ
    “बेशक शिर्क (अल्लाह के साथ किसी और को जोड़ना) बहुत बड़ा ज़ुल्म है।”

    ➡ जो इंसान इंसान को या किसी और चीज़ को “खुदा जैसा” समझ कर इबादत करता है, वह सबसे बड़ा ज़ुल्म करता है —
    अपने ऊपर भी और अपने रब के हक़ पर भी।

    🔥 2. अल्लाह के अलावा किसी को दुआ, सज्दा या इबादत करना—अंधकार है

    📖 सूरह ज़ुमर 39:3

    وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاء
    “और जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को अपना सहारा और माबूद बनाते हैं…”

    ➡ अल्लाह के अलावा किसी से मदद माँगना, दुआ करना, सज्दा करना या उसे बड़ा खुदा मानना खुली गुमराही है।

    🔥 3. अल्लाह के अलावा किसी को खुदा बनाना—कई अंधेरों में गिरना

    📖 सूरह बक़रा 2:257

    وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَوْلِيَاؤُهُمُ الطَّاغُوتُ
    يُخْرِجُونَهُم مِّنَ النُّورِ إِلَى الظُّلُمَاتِ
    “और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके सरदार (जिन्हें वो मानते हैं) उन्हें नूर से अंधेरों की तरफ ले जाते हैं।”

    ➡ जो इंसान इंसान को खुदा बना लेता है, वह नूर (हिदायत) को छोड़कर अंधकार में गिरता है।

    🔥 4. अल्लाह के अलावा मददगार बनाना — गुमराही

    📖 सूरह बनी इस्राइल 17:56–57

    قُلِ ادْعُوا الَّذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِهِ
    “कहो! जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, उन्हें पुकार कर देखो।”

    ➡ यानी वे न तुम्हें सुनते हैं, न कोई फ़ायदा दे सकते हैं, न कोई नुक़सान।

    🔥 5. इंसान को इंसान के सामने सज्दा — पूरी तरह हराम

    📖 सूरह फ़ुस्सिलत 41:37

    لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ
    “न सूरज को सज्दा करो, न चाँद को…”

    ➡ जब आसमान की बड़ी–बड़ी मख़लूक़ को सज्दा नहीं कर सकते
    तो इंसान को सज्दा करना तो बिल्कुल हराम और शिर्क है।

    🔥 6. नबी भी खुदा नहीं, सिर्फ़ अल्लाह के बंदे और रसूल हैं

    📖 सूरह काहफ़ 18:110

    قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ
    “(ए नबी कह दीजिए) मैं भी तुम्हारी तरह एक इंसान हूँ।”

    ➡ किसी नबी को, वली को, पीर को, मौलवी को खुदा का दर्जा देना गुमराही है।
    नबी ﷺ भी इबादत के हक़दार सिर्फ अल्लाह को बताते हैं।

    🔥 7. अल्लाह के अलावा किसी को पुकारना — पूरी तरह व्यर्थ

    📖 सूरह हज 22:73

    إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَن يَخْلُقُوا ذُبَابًا
    “जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे एक मक्खी तक पैदा नहीं कर सकते।”

    ➡ जब इंसान या मूर्ति एक मक्खी नहीं बना सकती
    तो खुदा के बराबर कैसे हो सकती है?

    🌑 **कुरआन की ज़ोरदार हिदायत:

    इंसान को खुदा बनाना — सबसे गहरा अंधकार**

    कुरआन के मुताबिक:

    ऐसा इंसान नूर से अंधकार की तरफ जाता है

    उसका दिल भटका हुआ होता है

    वह दुनिया-आख़िरत दोनों में नुकसान में है

    इस गुमराही का नाम शिर्क है

    और शिर्क की मुहलत आख़िरत में माफ़ नहीं होती (सूरह निसा 4:48)

    🌟 सार (Summary)

    कुरआन में साफ़–साफ़ हिदायत है:

    ✔ अल्लाह के सिवा किसी इंसान को

    माबूद,
    रिज्क देने वाला,
    मुद्दत करने वाला,
    गुनाह माफ करने वाला,
    या
    हुक्म चलाने वाला

    मानना — सबसे बड़ा अंधकार, ज़ुल्म और शिर्क है।

    ✔ इबादत सिर्फ़ अल्लाह की

    दुआ सिर्फ़ अल्लाह से
    सज्दा सिर्फ़ अल्लाह को
    भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर

  4. क़ुरआन में कई जगह अल्लाह साफ़ बताते हैं कि ज़मीन पहले “मृत (बंजर, सूखी, वीरान)” थी और उस वक़्त इंसान का कोई वजूद नहीं था।
    आप जिस मोज़ू की तलाश कर रहे हैं, उससे सबसे ज़्यादा मिलती-जुलती दो मुख्य आयतें हैं:

    ✅ 1. इंसान का कोई वजूद ही नहीं था — सूरह दहर 76:1

    📖 अरबी

    هَلْ أَتَىٰ عَلَى الْإِنسَانِ حِينٌ مِّنَ الدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْئًا مَّذْكُورًا

    📖 हिंदी

    “क्या इंसान पर ऐसा लंबा ज़माना नहीं गुज़र चुका जब वह कोई ज़िक्र के लायक चीज़ भी नहीं था?”

    ➡ इस आयत में साफ़ बताया गया:
    इंसान का नामो-निशान तक नहीं था।
    वजूद नहीं था।
    ज़मीन थी लेकिन इंसान बिल्कुल नहीं था।

    ✅ 2. ज़मीन पहले “मुरदा” (बंजर) थी — सूरह हदीद 57:17

    📖 अरबी

    اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا

    📖 हिंदी

    “जान लो कि अल्लाह ज़मीन को उसकी मौत (बंजर होने) के बाद ज़िंदगी देता है।”

    ➡ यहाँ “मौत” (مَوْتِهَا) का मतलब:

    सूखी

    बंजर

    वीरान

    बेजान

    जहाँ कोई हरकत या ज़िंदगी न हो

    सृष्टि की शुरुआत में ज़मीन इसी हालत में थी।

    ✅ 3. अल्लाह जमीन को बनाने से पहले पानी पर उसका तख़्ता था — सूरह हूद 11:7

    (यह सृष्टि के शुरुआती दौर की तरफ़ इशारा करती है)

    📖 अरबी

    وَكَانَ عَرْشُهُ عَلَى الْمَاءِ

    📖 हिंदी

    “और (ज़मीन और आसमान को बनाने से पहले) उसका अर्श पानी पर था।”

    ✅ 4. ज़मीन और आसमान “धुंध/धुएँ” की हालत में थे — सूरह फ़ुस्सिलत 41:11

    📖 अरबी

    ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ

    📖 हिंदी

    “फिर वह आसमान की तरफ़ रुजु हुआ और वह (उस वक़्त) धुएँ की हालत में था।”

    ➡ ज़मीन भी शुरू में ठंडी, कठोर, बेजान थी।

    🔍 आपका सवाल जिस आयत से सबसे ज़्यादा मेल खाता है:

    सूरह दहर (76:1)

    जिसमें कहा गया कि इंसान का कोई वजूद ही नहीं था।

    और

    सूरह हदीद (57:17)

    जिसमें कहा गया कि ज़मीन “मुरदा” (बंजर, बेजान) थी।

    इन दोनों को मिला कर बात पूरी तरह वही बनती है जो आपने पूछी:

    ज़मीन पहले बेजान थी

    इंसान तब मौजूद नहीं था

    अल्लाह ने बाद में उसमें ज़िंदगी पैदा की

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