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Dawah Conveying God’s Message to the Non Muslims – Dr Zakir Naik



Dawah Conveying God’s Message to the Non Muslims – Dr Zakir Naik

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9 Comments

  1. I would like to make a statement… about that woman you bullied… when you said there was no verse where Jesus did not claim to be God. Really? Explain this.

    "25 The woman said to Him, 'I know that Messiah is coming' (who is called Christ). 'When He comes, He will tell us all things.' 26 Jesus said to her, 'I who speak to you am He.'" —John 4:25-26, New King James Version.

    I believe you have your answer. Good day.

  2. बिलकुल सही लेकिन कुरआन नाजिल हुआ तो जंग कितना करना पडा क्यों क्योंकि काफिर नहीं मानते थे इसी वजह से बहुत जंग नबी को करना पडा अल्लाह के हिदायत के मुताबिक। 👁️👁️✅ “Dawah — Conveying God’s Message to the Non-Muslims”
    इसका साधारण मतलब:

    🔹 अल्लाह के दीन (इस्लाम / कुरआन / तौहीद) का पैगाम
    🔹 लोगों तक अच्छे अंदाज़, हिकमत और प्यार के साथ पहुँचाना
    🔹 ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि दावत देना — समझाना, मजबूर नहीं करना

    📌 कुरआन में दावत-ए-इस्लाम की असली हिदायत

    ⭐ 1. हिकमत और मीठी बातों के साथ दावत

    > “अपने रब के रास्ते की तरफ हिकमत और अच्छी नसीहत के साथ दावत दो, और उनसे बहस करो तो सबसे अच्छे अंदाज़ में।”
    📖 सूरह अन-नहल 16:125

    🔹 दावत का तरीका — हिकमत, प्यार, सब्र, नरमी
    🔹 गुस्सा, झगड़ा, अपमान, जबरदस्ती — ❌ मना

    ⭐ 2. ज़बरदस्ती नहीं

    > “दीन (मज़हब) में कोई ज़बरदस्ती नहीं।”
    📖 सूरह अल-बक़रह 2:256

    🔹 दावत देना हमारा काम है
    🔹 हिदायत देना अल्लाह का काम है

    ⭐ 3. सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना — मुकाबला करना नहीं

    > “तुम पर केवल पैग़ाम पहुँचाना है, हिसाब तो हम लेंगे।”
    📖 सूरह अर-रअद 13:40

    🔹 दावत पंचनामा नहीं — अमानत है
    🔹 विरोध करने वालों को रोकना नहीं — स्पष्टीकरण देना है

    ⭐ 4. जो दावत दे — उसका खुद का चरित्र भी बेहतरीन हो

    > “लोगों से अच्छी बात करो।”
    📖 सूरह अल-बक़रह 2:83

    > “तुम्हारा सबसे अच्छा काम — सबसे अच्छा अख़लाक़ है।”
    📖 हदीस (तिर्मिज़ी)

    🔹 गंदी जुबान वाला “दावत देने वाला” नहीं बन सकता
    🔹 कैरेक्टर और शख़्सियत ही असली दावत है

    ⭐ 5. दावत सिर्फ़ मुसलमानों के लिए नहीं — पूरी इंसानियत के लिए

    > “और हमने तुम्हें भेजा ही नहीं مگر पूरी इंसानियत के लिए रहमत बना कर।”
    📖 सूरह अल-अंबिया 21:107

    🔹 पैग़ाम सिर्फ़ मुस्लिमों के लिए नहीं
    🔹 पूरी दुनिया के लिए — इंसाफ़, तौहीद, रहमत

    🔥 दावत का मिशन — कुरआन के हिसाब से 5 पॉइंट

    क्रम दावत क्या है कुरआन

    1 तौहीद का पैगाम पहुँचाना 16:125
    2 प्यार व हिकमत से समझाना 16:125
    3 ज़बरदस्ती न करना 2:256
    4 खुद अमल करने वाला होना 2:83
    5 इंसाफ़ और रहमत का मैसेज देना 21:107

    💡 नतीजा

    दावत का मतलब:

    ✔ कुरआन का पैगाम लोगों तक हिकमत और मोहब्बत के साथ पहुँचाना
    ✔ लोगों को हर हाल में इज़्ज़त देना
    ✔ किसी को मजबूर, अपमानित, या गाली नहीं देना
    ✔ नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना

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