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Surah Al Asr Encompasses all the Means to Achieving Happiness – Dr Zakir Naik

Surah Al Asr Encompasses all the Means to Achieving Happiness – Dr Zakir Naik
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👁️👁️🧠✅ अल-असर (Surah No. 103), आयत नंबर 3 है।
यह आयत इंसान की असली कामयाबी, नेक ज़िंदगी और आख़िरत की सफलता का पूरा फार्मूला बयान करती है।
—
📖 आयत (अरबी)
إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ
—
🌿 हिंदी अनुवाद (लफ़्ज़ी)
> “मगर वे लोग (घाटे में नहीं) जो
ईमान लाए,
अच्छे और नेक काम करते रहे,
एक-दूसरे को हक़ (सच / न्याय / दीन) की नसीहत करते रहे,
और एक-दूसरे को सब्र की नसीहत करते रहे।”
—
🌟 विस्तृत व्याख्या (तफ़सीर)
अल्लाह ने पिछली आयत (103:2) में फ़रमाया:
> “निस्संदेह इंसान घाटे में है।”
यानी हर इंसान असली नुकसान में है — उसकी ज़िंदगी खत्म हो रही है, समय जा रहा है, मौत करीब आ रही है —
अगर वह चार शर्तों पर नहीं चला तो।
🌙 अब आयत 103:3 में नुकसान से बचने की चार शर्तें बताई गई:
—
1️⃣ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا — जो ईमान लाए
यानी:
✔ अल्लाह पर यक़ीन
✔ नबी ﷺ पर यक़ीन
✔ कुरआन पर यक़ीन
✔ फरिश्तों, आख़िरत और तक़दीर पर यक़ीन
💠 सिर्फ ज़बान का ईमान काफी नहीं — दिल और अमल में भी दिखाई दे।
—
2️⃣ وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ — और अच्छे (नेक) अमल करें
ईमान के बाद अमल ज़रूरी है।
✔ नमाज़, रोज़ा, ज़कात, दान
✔ अच्छे अख़्लाक, माता-पिता की इज्ज़त
✔ हलाल कमाना
✔ ज़ुल्म से बचना
✔ सही व्यवहार करना
💠 सिर्फ “मेरा दिल साफ़ है” कहकर अमल छोड़ देना इस्लाम नहीं है।
—
3️⃣ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ — और एक-दूसरे को हक़ की नसीहत करना
हक़ मतलब:
✔ दीन का सच
✔ न्याय / इंसाफ़
✔ अच्छाई की दावत
✔ बुराई से रोकना
✔ सच्चाई का साथ देना
💠 सिर्फ खुद ठीक होना काफी नहीं — समाज को भी अच्छाई की तरफ बुलाना होगा।
—
4️⃣ وَतَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ — और एक-दूसरे को सब्र की नसीहत करना
सब्र के मतलब:
✔ मुश्किल वक़्त में हिम्मत न हारना
✔ गुनाहों से बचने में सब्र
✔ इबादत पर क़ायम रहने में सब्र
✔ तकलीफ, गाली, नाइंसाफी के बावजूद हक़ पर डटे रहना
💠 जो हक़ की दावत देता है, उसे परेशानियां मिलती हैं — इसलिए सब्र जरूरी है।
—
🔥 क्यों यह आयत पूरी इंसानियत का निचोड़ है?
इमाम शाफ़िई रहिमहुल्लाह ने कहा:
> “अगर लोग सिर्फ सूरह अल-असर पर अमल कर लें तो दीन के लिए यह काफी है।”
क्योंकि इसमें सारा दीन शामिल है:
दीन का हिस्सा आयत में कहाँ
ईमान अमनू
इबादत और अच्छे काम अमिलुस-स़ालिह़ात
दावत और सामाजिक ज़िम्मेदारी तवासौ बिल-हक़
मुश्किलों में स्टेडफ़ास्टनेस तवासौ बिस-स़ब्र
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🌈 आज की ज़िंदगी में इस आयत का संदेश
🔹 पैसा हो, शोहरत हो, ताकत हो — पर ये चार चीज़ें न हों → इंसान घाटे में
🔹 ग़रीब हो, कमजोर हो, लेकिन ये चार चीज़ें हों → इंसान असली कामयाबी में
खुशी, सुकून, बरकत, सम्मान, जन्नत — सब इसी फार्मूले के अंदर हैं।
🌙✨
सूरह अल-असर (वक़्त / Time) छोटी होने के बावजूद पूरे इंसान की कामयाबी और असली खुशी (True Happiness) का फार्मूला बताती है। यही वजह है कि कहा जाता है:
> “Surah Al-Asr encompasses all the means to achieving happiness.”
यानी सूरह अल-असर असली खुशी और कामयाबी हासिल करने के सारे तरीक़ों को समेटती है।
—
📖 पूरी सूरह अल-असर
وَالْعَصْرِ إِنَّ الْإِنسَانَ لَفِي خُسْرٍ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ
हिंदी अनुवाद
> “समय की क़सम!
निस्संदेह इंसान घाटे में है।
सिवाय उनके — जो ईमान लाए, नेक अमल करते रहे, एक दूसरे को हक़ की नसीहत करते रहे और सब्र की नसीहत करते रहे।”
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🌟 इस सूरह में खुशी और कामयाबी का फार्मूला क्या है?
अल्लाह ने इंसान के नुकसान से निकलकर असली खुशी / सफलता पाने के 4 रास्ते बताए:
क्रम शर्त मतलब
1 ईमान (Iman) अल्लाह, रसूल, आखिरत, किताबें — दिल में यक़ीन
2 नेक अमल (Good deeds) इबादत + अच्छे अख़्लाक + इंसाफ़ + दान + हलाल ज़िंदगी
3 हक़ की नसीहत (Calling to the truth) अच्छाई की दावत, बुराई से रोकना, सच और न्याय पर डटाना
4 सब्र की नसीहत (Calling to patience) मुश्किल, तकलीफ़, ग़ुस्सा, ग़म—हर हाल में सब्र और हौसले पर जमना
📌 इन 4 शर्तों के मिलने पर इंसान को क्या मिलता है?
🔹 दिल की सुकून
🔹 दुनिया में सम्मान
🔹 अच्छी ज़िंदगी
🔹 मौत पर ईमान
🔹 क़ब्र में राहत
🔹 और आखिरत में जन्नत
यही True Happiness है।
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🌙 इस सूरह की ताकत — तफ़सीर के अनुसार
इमाम शाफ़िई रहिमहुल्लाह ने कहा:
> “अगर लोग सिर्फ सूरह अल-असर पर अमल कर लें, तो वह उनके लिए काफी होगी।”
क्योंकि:
✔ सिर्फ ईमान से काम नहीं चलता
✔ सिर्फ नमाज़ / रोज़े से काम नहीं चलता
✔ सिर्फ हक़ बोलने से काम नहीं चलता
✔ सिर्फ सब्र से काम नहीं चलता
चारों को मिलाकर चलना होगा — तभी पूरा दीन + पूरा इंसान + पूरी सफलता मिलती है।
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🔥 क्यों आज के दौर में लोग अंदर से टूटा हुआ और दुखी हैं?
क्योंकि सूरह अल-असर की 4 शर्तों में से कोई न कोई कमी रहती है:
आम समस्या क़ुरआन के अनुसार कारण
दिल में बेचैनी ईमान कमज़ोर
ज़िंदगी में मुश्किलें बढ़ती नेक अमल कम
समाज में अनैतिकता हक़ की नसीहत नहीं
रिश्तों में टूट-फूट सब्र की कमी
इसलिए असली खुशी पाना इन 4 चीज़ों के बिना नामुमकिन है।
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🌟 नतीजा (Summary)
सूरह अल-असर सिखाती है:
खुशी = पैसे, ताकत, शोहरत में नहीं
खुशी = ईमान + अच्छे अमल + सच पर डटे रहना + सब्र
जो इन 4 रास्तों को अपनाता है: ✔ अल्लाह उसकी दुनिया सुधार देता है
✔ दिल में सुकून भर देता है
✔ और आखिरत में जन्नत देता है
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Aslmk
Hi