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Reality of Women s Liberalisation – Dr Zakir Naik



Reality of Women s Liberalisation – Dr Zakir Naik

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  1. 🌺 2️⃣ हया (शर्मो-हया) ईमान का हिस्सा है

    रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

    > "الحياء شعبة من الإيمان"
    “हया ईमान का हिस्सा है।”
    — (सहीह बुखारी)

    🩵 यानी, जिस समाज में हया खत्म हो जाती है, वहाँ से ईमान भी धीरे-धीरे उठ जाता है।

    ⚖️ 3️⃣ “उदारीकरण” का गलत मतलब

    आजकल “women empowerment” या “liberation” के नाम पर कुछ लोग यह समझते हैं कि:

    > औरत वही आज़ाद है जो कम कपड़े पहने, या अपने शरीर का प्रदर्शन करे।

    लेकिन इस सोच ने औरत को इज़्ज़त से नहीं, बल्कि नज़रों की मज़लूम बना दिया है।
    कुरआन ने कहा है:

    > وَلَا تَبَرَّجْنَ تَبَرُّجَ الْجَاهِلِيَّةِ الْأُولَىٰ
    (“और पुराने ज़माने की जाहिलियत की तरह सजधज कर अपनी ज़ीनत (सौंदर्य) को न दिखाओ।”)
    — सूरह अल-अहज़ाब (33:33)

    📖 मतलब:
    औरत का असली सौंदर्य उसके अख़लाक़ (चरित्र) और ईमान में है, न कि शरीर के प्रदर्शन में।

    💎 4️⃣ असली आज़ादी क्या है?

    अल्लाह की नज़र में औरत की “आज़ादी” का मतलब है:

    बेइज़्ज़ती और फितनों से बचना,

    अपने शरीर, ईमान और हया की हिफ़ाज़त करना,

    अपने हक़ (तालीम, इज़्ज़त, सुरक्षा) को इस्लाम के दायरे में हासिल करना।

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